प्राचीन काल

कांचीपुरम का इतिहास
  • कांचीपुरम का उल्लेख पुराणों और महाभारत में मिलता है।
  • इसे कांची या कांचीपुरम के नाम से जाना जाता है।
  • यह चोल, पल्लव और पांड्य वंश के समय में महत्वपूर्ण धार्मिक और शैक्षणिक केंद्र था।

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🌟 2. धार्मिक महत्व

  • कांचीपुरम को हिंदू धर्म के चार धामों के बाद दक्षिण का प्रमुख तीर्थ माना जाता है।
  • इसे “कोणार्क नगरी” और “दक्षिण का वाराणसी” भी कहा जाता है।
  • यहाँ शैव और वैष्णव दोनों सम्प्रदायों के मंदिर हैं।
  • यहाँ वेद और उपनिषदों का अध्ययन प्राचीन काल में होता था।

🌟 3. शासक और शासन

  • पल्लव वंश (4वीं–9वीं शताब्दी):
    • कांचीपुरम को राजनीतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक केंद्र बनाया।
    • कई महत्त्वपूर्ण मंदिर और स्मारक इस काल में बने।
  • चोल वंश (9वीं–13वीं शताब्दी):
    • मंदिरों और शिक्षा के क्षेत्र में और विकास।
  • विजयनगर और अन्य दक्षिण भारतीय राजवंशों ने भी कांचीपुरम को संरक्षण दिया।

🌟 4. वास्तुकला और कला

  • कांचीपुरम के मंदिर दक्षिण भारतीय शैली (Dravidian Style) में बने हैं।
  • प्रमुख निर्माण में गोपुरम, मन्दपम और विशाल शिखर शामिल हैं।
  • यहाँ की कांचीपुरम साड़ियाँ भी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का हिस्सा हैं।

🌟 5. आधुनिक महत्व

  • आज भी कांचीपुरम धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र है।
  • शैव और वैष्णव तीर्थ यात्रियों के लिए प्रसिद्ध।
  • मंदिरों के अलावा हस्तशिल्प और साड़ी उद्योग से आर्थिक महत्व भी है।